नैनीताल में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन में देरी पर सांसद अजय भट्ट सख्त, मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

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नैनीताल में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन में देरी पर सांसद अजय भट्ट सख्त, मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

नैनीताल।
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एवं नैनीताल–उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद श्री अजय भट्ट ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से दूरभाष पर वार्ता कर नैनीताल जनपद में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) परियोजना में हो रही देरी पर गहरी चिंता जताई। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस महत्वपूर्ण जनहित परियोजना में आ रही बाधाओं को दूर करने हेतु तत्काल आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

सांसद श्री भट्ट ने अवगत कराया कि उनकी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत जनपद नैनीताल में एचपीसीएल (HPCL) द्वारा लगभग ₹400 करोड़ के निवेश से सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन अवसंरचना विकसित की जा रही है, जिसके अंतर्गत 12 सीएनजी स्टेशन वर्तमान में संचालित हैं। इसके बावजूद परियोजना लंबे समय से विभिन्न कारणों से प्रभावित हो रही है।

उन्होंने बताया कि रुद्रपुर से हल्द्वानी तक गैस पाइपलाइन का कार्य प्रगति पर है तथा रामपुर रोड में पाइपलाइन बिछाने का कार्य लगभग पूर्ण होने वाला है। वहीं कालाढूंगी क्षेत्र में 15–20 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क पुनर्स्थापन शुल्क अत्यधिक होने के कारण आगे का कार्य प्रारंभ नहीं हो पा रहा है।

इसके अतिरिक्त नैनीताल रोड पर 50–60 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है, जिसका प्रस्ताव जिलाधिकारी नैनीताल के पास लंबे समय से लंबित है।

मुख्य समस्याएं जो कार्य में बाधा बन रही हैं—

  1. लोक निर्माण विभाग द्वारा पुनर्स्थापन शुल्क अत्यधिक होना (उत्तर प्रदेश में ₹300 प्रति मीटर के मुकाबले उत्तराखंड में ₹3500 प्रति मीटर)।
  2. भूमि की अनुपलब्धता के कारण सीएनजी स्टेशनों की स्थापना में देरी।
  3. नगरपालिका/नगर निगम की प्रक्रियाओं के चलते भूमि आवंटन में विलंब।
  4. पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरणीय संवेदनशीलता के कारण पाइपलाइन बिछाने की अनुमति न मिलना।

सांसद श्री अजय भट्ट ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए

लोक निर्माण विभाग द्वारा पुनर्स्थापन शुल्क का युक्तीकरण कर उसे उत्तर प्रदेश की तर्ज पर कम किया जाए,मदर स्टेशन, सीएनजी स्टेशन एवं DCU जैसी प्रमुख सुविधाओं के लिए उपयुक्त भूमि का शीघ्र आवंटन सुनिश्चित किया जाए,तथा संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।

 

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