हाथियों का आतंक – सूर्यनगर के शिव मंदिर में तोड़फोड़ – फसलें रौंदी – हैंडपम्प उखाड़ा- पुजारी ने भागकर बचाई अपनी जान
पंतनगर क्षेत्र में बीते बृहस्पतिवार की शाम जंगली हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। डौली रेंज से सटे सूर्यनगर इलाके में जंगल से निकले हाथियों ने आबादी वाले क्षेत्र में घुसकर प्राचीन शिव मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की और आसपास की क्यारियों को रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाया।
जानकारी के अनुसार, सूर्यनगर स्थित शिव मंदिर में शाम ढलते ही तीन हाथी जंगल की ओर से मंदिर की दिशा में आते दिखाई दिए। मंदिर में रह रहे पुजारी (बाबा) ने बताया कि हाथियों को आता देख उन्होंने शोर मचाकर उन्हें भगाने का प्रयास किया, लेकिन हाथी नहीं रुके और मंदिर परिसर में घुस आए। हाथियों को अपनी ओर बढ़ता देख पुजारी ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।
हाथियों ने मंदिर परिसर में लगे एक हैंडपंप को उखाड़ दिया और दो प्रेशर नलों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे मंदिर में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा मंदिर के आसपास बनी क्यारियों को भी हाथियों ने रौंदकर नष्ट कर दिया। पुजारी ने वन विभाग से नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक सहायता की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। आए दिन जंगली हाथी गन्ना, लाही और गेहूं की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हाथियों से फसलों की सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो वे वन विभाग के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि हाथियों के खेतों में घुसने की सूचना वन विभाग को दी जाती है, लेकिन विभागीय अधिकारी काफी देर से मौके पर पहुंचते हैं। तब तक हाथी वापस जंगल की ओर लौट जाते हैं और किसान नुकसान झेलने को मजबूर हो जाते हैं।
वहीं वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाथी जंगली जानवर हैं और जंगल उनका प्राकृतिक घर है। अधिकारी बताते हैं कि हाथियों को विभाग ने नहीं छोड़ा है और उनकी आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं है।
इस मामले में समाजसेवी दीपक मेहता, कुंदन दानू और पुरोहित बसंत तिवारी ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि वन विभाग ने शीघ्र ही जंगली हाथियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया, तो क्षेत्र में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसी किसी भी घटना की जिम्मेदारी पूरी तरह वन विभाग की होगी।

