उत्तराखंड में बदलेगा बिजली बिल का गणित, दिन में सस्ती और अधिक खपत के समय महंगी बिजली

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उत्तराखंड: अधिक खपत वाले समय में महंगा बिजली बिल, सोलर समय में उद्योगों को 20% सस्ती बिजली

उत्तराखंड में बदलेगा बिजली बिल का गणित, दिन में सस्ती और अधिक खपत के समय महंगी बिजली

समय के हिसाब से तय होंगी बिजली दरें, सोलर समय में 20% राहत, अधिक खपत पर बढ़ेगा बिल

उत्तराखंड में नई बिजली नीति- दिन में सस्ती, सुबह-शाम अधिक खपत पर महंगी दरें

उद्योगों के लिए समय आधारित बिजली दरें, सोलर समय में फायदा, अधिक खपत पर जेब पर असर

उत्तराखंड में उद्योगों और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए अब बिजली का बिल इस बात पर निर्भर करेगा कि बिजली का उपयोग किस समय किया गया। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग राज्य में समय आधारित टैरिफ व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत अधिक बिजली खपत वाले समय में उपभोक्ताओं को महंगा बिजली बिल चुकाना होगा, जबकि दिन के समय सौर ऊर्जा उपलब्ध होने पर बिजली 20 प्रतिशत तक सस्ती मिलेगी।
यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के विद्युत (उपभोक्ताओं के अधिकार) संशोधन नियम, 2023 के तहत तैयार किया गया है। आयोग ने इस संबंध में कांसेप्ट पेपर जारी करते हुए 31 जनवरी तक आम जनता, उद्योगों और संस्थाओं से सुझाव आमंत्रित किए हैं।
प्रस्ताव के अनुसार, दिन के आठ घंटे ‘सोलर समय’ के रूप में तय किए जाएंगे, जिनमें बिजली की दरें सामान्य दर से कम से कम 20 प्रतिशत कम होंगी। आयोग का मानना है कि इससे उद्योगों को दिन के समय उत्पादन गतिविधियाँ बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा और सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा।
वहीं, सुबह और शाम के वे घंटे जब बिजली की मांग सबसे अधिक रहती है, उन्हें अधिक खपत वाला समय माना जाएगा। इस दौरान बिजली दरें अधिक रखी जाएंगी, ताकि बिजली प्रणाली पर दबाव कम किया जा सके और अनावश्यक खपत को नियंत्रित किया जा सके।
आयोग के अनुसार, उत्तराखंड में अब तक सोलर और गैर-सोलर समय को स्पष्ट रूप से अलग-अलग परिभाषित नहीं किया गया था। स्मार्ट मीटरों की स्थापना और रूफटॉप सोलर के बढ़ते उपयोग से बिजली खपत का स्वरूप बदल रहा है, ऐसे में समय आधारित दरों को लागू करना जरूरी हो गया है।
यूपीसीएल ने अगस्त 2024 से स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। योजना के अनुसार, एचटी उपभोक्ताओं के लिए जुलाई 2025 और लो-टेंशन उपभोक्ताओं के लिए जून 2026 तक स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।
कांसेप्ट पेपर में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में लागू समय आधारित बिजली दरों का अध्ययन भी शामिल किया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक खपत के आंकड़ों और प्राप्त सुझावों के आधार पर ही अंतिम टैरिफ संरचना तय की जाएगी।
इच्छुक उपभोक्ता और संस्थाएं अपने सुझाव 31 जनवरी तक उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग को भेज सकती हैं।

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