उत्तराखंड – मानसिक स्वास्थ्य बना गंभीर संकट, 10 महीनों में 3,000 से अधिक साइकोसीस व एंग्जायटी के मरीज

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मानसिक स्वास्थ्य बना गंभीर संकट, 10 महीनों में 3,000 से अधिक अवसाद व एंग्जायटी के मरीज
जिले में मानसिक बीमारी अब सामान्य स्वास्थ्य समस्या नहीं रही, बल्कि यह धीरे-धीरे सामाजिक संकट का रूप लेती जा रही है। डिप्रेशन, एंग्जायटी और साइकोसिस जैसे मानसिक रोगों के मामलों में तेज़ी से इजाफा हुआ है, जबकि इसके अनुपात में इलाज, परामर्श, रिहैबिलिटेशन और लॉन्ग-टर्म केयर की सुविधाएं बेहद सीमित हैं।
जिला अस्पताल जेएनएल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) की अप्रैल से जनवरी तक की 10 मासिक रिपोर्टें हालात की गंभीर तस्वीर पेश करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार डिप्रेशन और एंग्जायटी से पीड़ित मरीजों की संख्या 3,000 से 3,300 के बीच पहुंच चुकी है। यानी हर महीने औसतन 300 से अधिक लोग मानसिक तनाव और अवसाद के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे।
साइकोसिस के बढ़ते मामले चिंता का विषय
मानसिक रोगों में सबसे गंभीर संकेत साइकोसिस को लेकर सामने आए हैं। यह एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को भ्रम (Delusions), मतिभ्रम (Hallucinations), सोच और व्यवहार में असंतुलन तथा वास्तविकता से कटाव की समस्या होती है। ऐसे मरीजों को लंबे समय तक इलाज, नियमित दवा और कई बार भर्ती की जरूरत पड़ती है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 10 महीनों में 180 से 250 साइकोसिस के नए मरीज सामने आए हैं, यानी हर महीने औसतन 15 से 25 गंभीर रोगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नशे से जुड़ी मानसिक बीमारियां अधिक हिंसक, अस्थिर और सामाजिक रूप से खतरनाक साबित हो सकती हैं।
रिहैबिलिटेशन की कमी, परिवार पर बढ़ता बोझ
चिंताजनक तथ्य यह है कि बढ़ते मामलों के बावजूद जिले में
न तो कोई अलग रिहैबिलिटेशन सेंटर है
और न ही लॉन्ग-टर्म मानसिक देखभाल की ठोस व्यवस्था
इलाज जिला अस्पताल तक सीमित है, जबकि मानसिक बीमारी का बोझ परिवार और समाज को झेलना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसिक स्वास्थ्य को अब भी गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में यह स्थिति कानून-व्यवस्था, पारिवारिक टूटन और सामाजिक अस्थिरता को जन्म दे सकती है। यह सिर्फ स्वास्थ्य विभाग नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।
10 महीनों में मानसिक बीमारी की स्थिति (अप्रैल–जनवरी)
डिप्रेशन व एंग्जायटी: 3,000–3,300 मरीज
साइकोसिस (गंभीर मानसिक रोग): 180–250 मरीज
नशे से जुड़ी मानसिक समस्याएं: 220–300 मरीज
मानसिक स्वास्थ्य ओपीडी: 350–550 मरीज प्रतिमाह
कुल रिपोर्ट: 10 मासिक रिपोर्ट
मानसिक रोगों की संक्षिप्त जानकारी
डिप्रेशन:
लंबे समय तक उदासी, निराशा, अकेलापन, नींद और भूख में कमी। यह कमजोरी नहीं बल्कि इलाज योग्य मानसिक बीमारी है।
एंग्जायटी:
बार-बार डर, घबराहट, बेचैनी, तेज़ दिल की धड़कन और नकारात्मक सोच। समय पर इलाज से नियंत्रण संभव।
साइकोसिस:
गंभीर मानसिक अवस्था, जिसमें व्यक्ति वास्तविकता से कट जाता है, भ्रम और मतिभ्रम होते हैं तथा व्यवहार असामान्य हो जाता है। लंबे इलाज की आवश्यकता होती है।
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष
“जिले में मानसिक रोगियों के इलाज को गंभीरता से लिया जा रहा है। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत नियमित ओपीडी संचालित की जा रही है। डिप्रेशन, एंग्जायटी और साइकोसिस के मरीजों का इलाज तय प्रोटोकॉल के अनुसार किया जा रहा है। गंभीर मामलों को आवश्यकता पड़ने पर उच्च केंद्रों के लिए रेफर किया जाता है। तनावपूर्ण जीवनशैली, नशे की प्रवृत्ति और सामाजिक बदलाव मानसिक बीमारियों के प्रमुख कारण हैं।”
— डॉ. केके अग्रवाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी रुद्रपुर

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