उत्तराखंड पर्वतीय क्षेत्र में वनाग्नि का विकराल रूप, जंगलों में आग की लपटें व धुएं की चपेट से ढका
उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में वनाग्नि ने एक बार फिर भयावह रूप धारण कर लिया है। सबसे गंभीर हालात उत्तरकाशी जिले में बने हुए हैं, जहाँ जंगलों में लगी आग से उठता काला धुआँ गंगा और यमुना घाटी को पूरी तरह ढक चुका है।
आग का असर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। गंगा घाटी से लेकर यमुना घाटी तक के बड़े वन क्षेत्र इसकी चपेट में आ चुके हैं। कई पहाड़ियों पर एक साथ आग धधक रही है, जिससे हालात लगातार और भयावह होते जा रहे हैं। आग की लपटें जिला मुख्यालय के खतरनाक रूप से करीब पहुँच गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को अपने घरों और मवेशियों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है।
यमुनोत्री हाईवे पर बढ़ा खतरा
यमुनोत्री हाईवे पर सफर कर रहे यात्रियों और स्थानीय लोगों ने धरासू बैंड और फेडी क्षेत्र के पास भीषण आग की सूचना दी है। सड़क किनारे तक पहुँच चुकी लपटों और घने धुएँ के कारण दृश्यता बेहद कम हो गई है, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
धुएँ की मोटी चादर, सांस लेना हुआ मुश्किल
लगातार जल रहे जंगलों के कारण उत्तरकाशी के बड़े हिस्से में धुएँ की मोटी चादर छा गई है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और घुटन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
प्रशासन के लिए बनी बड़ी चुनौती
शुष्क मौसम और तेज हवाओं के चलते आग पर काबू पाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें आग बुझाने में जुटी हैं, लेकिन दुर्गम इलाकों और तेजी से फैलती आग के कारण हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं।

