उत्तराखंड तबादला सूची पर 36 घंटे में पलटा फैसला, निदेशक ऑडिट की नियुक्ति – शासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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उत्तराखंड तबादला सूची पर 36 घंटे में पलटा फैसला, निदेशक ऑडिट की नियुक्ति – शासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

उत्तराखंड शासन की हाल ही में जारी तबादला सूची महज 36 घंटे में ही विवादों के भंवर में फंस गई। मामला इतना गंभीर हुआ कि कार्मिक विभाग को आनन-फानन में संशोधन आदेश जारी कर गलत नियुक्ति को निरस्त करना पड़ा। इस घटनाक्रम ने शासन की तबादला और नियुक्ति प्रक्रिया पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
शनिवार, 17 जनवरी को जारी तबादला सूची में कुल 18 आईएएस अधिकारियों के साथ एक वित्त सेवा अधिकारी को भी नई जिम्मेदारी दी गई थी। सूची के 19वें क्रम पर वित्त सेवा के अधिकारी मनमोहन मैनाली को निदेशक ऑडिट जैसे संवेदनशील और शीर्ष पद पर तैनात कर दिया गया।

गजट के खिलाफ नियुक्ति, मचा बवाल

जैसे ही यह आदेश सार्वजनिक हुआ, लेखा परीक्षा विभाग और कर्मचारी संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। उत्तराखंड लेखा परीक्षा सेवा संघ ने इस नियुक्ति को नियमों के विरुद्ध बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।
संघ का स्पष्ट कहना था कि निदेशक ऑडिट का पद गजट अधिसूचना के अनुसार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) कैडर के लिए आरक्षित है, ऐसे में किसी अन्य सेवा संवर्ग के अधिकारी की तैनाती न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को भी असंतुलित करने वाली है।

वरिष्ठता और अनुशासन पर खतरे की आशंका

संघ ने यह भी चेताया कि यदि यह आदेश लागू होता, तो लेखा परीक्षा विभाग में मनमोहन मैनाली से वरिष्ठ अधिकारी उनके अधीन कार्य करने को मजबूर होते, जिससे वरिष्ठता क्रम, विभागीय अनुशासन और कार्य संस्कृति पर गंभीर असर पड़ता।

संघ अध्यक्ष का तीखा बयान

उत्तराखंड लेखा परीक्षा सेवा संघ के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह चौहान ने कहा—
“मनमोहन मैनाली मूल रूप से वित्त सेवा के अधिकारी हैं और अपने ही संवर्ग में वे विभागाध्यक्ष बनने की पात्रता नहीं रखते। ऐसे में उन्हें लेखा परीक्षा विभाग का सर्वोच्च पद सौंपना नियमों की खुली अनदेखी है। यह निर्णय न केवल अनुचित है, बल्कि इससे विभागीय संतुलन और अनुशासन भी प्रभावित होता।”

कर्मचारियों में फैला असंतोष

इस फैसले के बाद विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों में भारी असंतोष फैल गया। सवाल उठने लगे कि जब नियम और गजट स्थिति पूरी तरह स्पष्ट थी, तो कार्मिक विभाग से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। साथ ही यह भी चर्चा तेज हो गई कि इस गलती की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।

विरोध बढ़ा तो शासन को उठाना पड़ा कदम पीछे

लगातार बढ़ते विरोध और दबाव के बाद शासन को आखिरकार बैकफुट पर आना पड़ा। तबादला आदेश जारी होने के मात्र 36 घंटे के भीतर कार्मिक विभाग ने संशोधन आदेश जारी कर मनमोहन मैनाली की निदेशक ऑडिट के पद पर नियुक्ति को निरस्त कर दिया।
शासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि अब इस पद पर शीघ्र ही किसी योग्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी की तैनाती की जाएगी।

शासन की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण ने तबादला और नियुक्ति जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में नियमों, कैडर व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महज 36 घंटे में बदली गई तबादला सूची ने यह संकेत भी दिया है कि शासन स्तर पर निर्णय लेने से पहले नियमों की गहन पड़ताल और जवाबदेही तय करना कितना जरूरी है।

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