फर्जी सिबिल स्कोर से लग्जरी कार लोन, क्लोन गाड़ियों से इंश्योरेंस क्लेम: करोड़ों की ठगी करने वाला अंतरराज्यीय वाहन गिरोह बेनकाब

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फर्जी सिबिल स्कोर से लग्जरी कार लोन, क्लोन गाड़ियों से इंश्योरेंस क्लेम: करोड़ों की ठगी करने वाला अंतरराज्यीय वाहन गिरोह बेनकाब

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (इंटर स्टेट सेल) ने एक ऐसे अंतरराज्यीय वाहन गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने सुनियोजित फर्जीवाड़े के जरिए बैंकिंग और इंश्योरेंस सिस्टम को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। यह गिरोह सिर्फ वाहन चोरी तक सीमित नहीं था, बल्कि फर्जी बैंक खातों, कृत्रिम रूप से सुधारे गए सिबिल स्कोर, फर्जी रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस क्लेम के माध्यम से देश के वित्तीय ढांचे में गहरी सेंध लगा रहा था।
पुलिस ने गिरोह के कब्जे से 16 लग्जरी वाहन बरामद किए हैं। इनमें आठ टोयोटा फॉर्च्यूनर, पांच किया सेल्टोस, एक महिंद्रा थार, एक हुंडई क्रेटा और एक हुंडई वेन्यू शामिल हैं।
फर्जी खातों से सुधरता था सिबिल स्कोर
जांच में सामने आया है कि आरोपी पहले संगठित नेटवर्क के जरिए फर्जी नामों पर खुले बैंक खाते खरीदते थे, जिन्हें वे खुद ऑपरेट करते थे। इन खातों में योजनाबद्ध तरीके से लेनदेन कर बैंक रिकॉर्ड में इनका क्रेडिट स्कोर (सिबिल) आर्टिफिशियली बेहतर किया जाता था।
जब खाते लोन योग्य दिखने लगते, तो इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर नामी शोरूम से महंगी गाड़ियों पर बैंक लोन लिया जाता था। वाहन मिलने के कुछ समय बाद ही आरोपी जानबूझकर ईएमआई भुगतान बंद कर देते थे और गाड़ियों को या तो गायब कर देते थे या पहले से तैयार नेटवर्क के जरिए बेच दिया जाता था। इससे बैंकों को सीधा आर्थिक नुकसान हुआ और लोन एनपीए में तब्दील हो गए।
इंश्योरेंस कंपनियां भी बनीं शिकार
गिरोह ने इंश्योरेंस सिस्टम को भी अपने फर्जीवाड़े का जरिया बनाया। चोरी या क्लोन की गई गाड़ियों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इंश्योरेंस पॉलिसी ली जाती थी और बाद में उन्हें दुर्घटनाग्रस्त या चोरीशुदा दिखाकर मोटे क्लेम हड़पने की तैयारी की जाती थी।
आरटीओ-आरएलए तक फैला नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क बिलासपुर सहित विभिन्न राज्यों के आरटीओ और आरएलए कार्यालयों के कर्मचारियों व एजेंटों की मिलीभगत से संचालित हो रहा था। फर्जी फॉर्म-21, नकली सेल लेटर और फर्जी बैंक एनओसी के आधार पर चोरी या लोन डिफॉल्ट वाली गाड़ियों का नया रजिस्ट्रेशन कराया जाता था।
कई मामलों में टोटल-लॉस या वाटर-डैमेज वाहनों के चेसिस नंबर चोरी की गाड़ियों पर पंच कर उन्हें क्लोन किया गया, जिससे वाहन कागजों में पूरी तरह वैध नजर आने लगे।
सरकारी राजस्व को भी भारी चपत
इस पूरे फर्जीवाड़े में सरकार को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क के रूप में भी करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।

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