बिना आपकी मौजूदगी बैंक में खुले खाते, फर्जी दस्तखत और लाखों का लेनदेन: हल्द्वानी में KYC सिस्टम बेनकाब, असली दस्तखत नकली पहचान 

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बिना आपकी मौजूदगी बैंक में खुले खाते, फर्जी दस्तखत और लाखों का लेनदेन: हल्द्वानी में KYC सिस्टम बेनकाब, असली दस्तखत नकली पहचान

 

देवभूमि उत्तराखंड के हल्द्वानी से बैंकिंग सिस्टम की नींव हिला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक आम नागरिक के नाम पर उसकी जानकारी और सहमति के बिना बैंक खाता खोल दिया गया और उसमें वर्षों तक लाखों रुपये का लेनदेन चलता रहा। यह मामला सीधे तौर पर बैंकों के KYC मानकों, आंतरिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
गौजाजाली निवासी अनुभव पंत के नाम पर यह फर्जी खाता बरेली रोड स्थित कैनरा बैंक शाखा में वर्ष 2023 में खोला गया। हैरानी की बात यह रही कि न खाताधारक बैंक गया, न कोई फॉर्म भरा और न ही हस्ताक्षर किए—फिर भी खाता पूरी तरह सक्रिय रहा।
टैक्स दस्तावेजों ने खोला राज
इस गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ, जब वर्ष 2025 में अनुभव पंत के TDS और इनकम टैक्स रिटर्न में अनजान आय दर्ज पाई गई। 4 सितंबर 2025 को अकाउंटेंट की जांच में सामने आया कि उनके नाम से एक ऐसा बैंक खाता संचालित हो रहा है, जिसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।
दस्तावेज असली, लेकिन पहचान नकली
प्राथमिक जांच में सामने आया कि खाते में अनुभव पंत का आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो प्रयुक्त किए गए, लेकिन बैंक रिकॉर्ड में मौजूद हस्ताक्षर जाली थे।
पीड़ित का आरोप है कि मोबाइल मार्केटिंग कार्य के दौरान उनके डिस्ट्रीब्यूटर संजय कोहली के पास उनके दस्तावेज उपलब्ध थे, जिनका दुरुपयोग कर यह फर्जीवाड़ा किया गया। संदेह है कि इसमें बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी हो सकती है।
पुलिस टालती रही, अदालत ने दिखाई सख्ती
पीड़ित द्वारा कई बार शिकायत के बावजूद पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई। अंततः मामला अदालत पहुंचा, जहां अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) ने पुलिस की कार्यशैली पर नाराज़गी जताते हुए तत्काल FIR दर्ज करने के आदेश दिए।
जांच के घेरे में बैंक और लेनदेन
अब हल्द्वानी पुलिस बैंक के KYC रिकॉर्ड, खाता खोलने से जुड़े दस्तावेज और संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग या वित्तीय अपराधों के लिए तो नहीं किया गया।
यह सिर्फ एक मामला नहीं
यह प्रकरण दर्शाता है कि यदि बैंकिंग सिस्टम में मिलीभगत हो, तो कोई भी नागरिक अपनी ही पहचान से बेखबर ठगा जा सकता है। सवाल यह है कि क्या ऐसे मामलों के बाद भी बैंक जवाबदेही तय करेंगे या फिर यह फाइलें भी सिस्टम में दबा दी जाएंगी?
जनहित में चेतावनी
नियमित रूप से AIS और Form 26AS की जांच करें
पहचान पत्रों की कॉपी पर उपयोग का उद्देश्य और तारीख लिखें
अनजान बैंकिंग अलर्ट को कभी नजरअंदाज न करें

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