गाजियाबाद की घटना से सबक, उत्तराखंड प्रशासन सतर्क, स्कूलों के लिए जारी हुई गेमिंग एडवाइजरी
ऑनलाइन गेमिंग की लत पर लगाम, देहरादून डीएम ने स्कूलों और अभिभावकों को दिए सख्त निर्देश
बच्चों की डिजिटल लत बनी चिंता, गाजियाबाद कांड के बाद उत्तराखंड में प्रशासन अलर्ट
ऑनलाइन गेमिंग पर नजर, देहरादून में स्कूलों को निर्देश, अभिभावकों को किया जा रहा जागरूक
गाजियाबाद की त्रासदी के बाद उत्तराखंड में सतर्कता, डीएम सविन बंसल ने जारी की एडवाइजरी
गाजियाबाद की घटना के बाद उत्तराखंड में बढ़ी सतर्कता, डीएम ने जारी की स्कूल एडवाइजरी
देहरादून।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सामने आई दर्दनाक घटना के बाद उत्तराखंड प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। बच्चों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत को गंभीरता से लेते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने स्कूलों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करते हुए संतुलित डिजिटल उपयोग और बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर निगरानी के निर्देश दिए हैं।
डीएम ने स्पष्ट कहा कि ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। इसे देखते हुए स्कूलों में बच्चों को डिजिटल संतुलन, समय प्रबंधन और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि बच्चों की गेमिंग आदतों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। समय रहते अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों की सतर्कता कई बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता है। इसके लिए स्कूल प्रबंधन को नियमित काउंसलिंग, जागरूकता सत्र और अभिभावक संवाद बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, 4 फरवरी को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से आई एक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। यहां एक रिहायशी इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर तीन सगी बहनों ने आत्महत्या कर ली थी। तीनों नाबालिग थीं, जिनकी उम्र 12, 14 और 16 वर्ष बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वे कोरियन ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेमिंग ऐप की लत की शिकार थीं।
पुलिस के अनुसार, मृतक बहनों ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था, जिसमें लिखा था—“मम्मी, पापा, सॉरी।” बताया गया कि माता-पिता उनकी ऑनलाइन गेमिंग की आदतों को लेकर अक्सर आपत्ति जताते थे।
इस घटना के बाद उत्तराखंड प्रशासन ने इसे चेतावनी के रूप में लेते हुए समय रहते कदम उठाने का निर्णय लिया है, ताकि राज्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

