राजकीय विश्वविद्यालयों में औद्योगिक प्रशिक्षण अनिवार्य, कौशल आधारित शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा – धन सिंह रावत
उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप लागू की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना और उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाना है।
उद्योगों से एमओयू करना होगा अनिवार्य
अब सभी विश्वविद्यालयों को विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करना होगा, ताकि विद्यार्थियों को उनके विषय से संबंधित प्रशिक्षण मिल सके। साथ ही प्रशिक्षण की मासिक प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजना भी अनिवार्य रहेगा।
सरकार की सख्त निगरानी
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट कहा है कि सभी राज्य विश्वविद्यालय उद्योगों से समन्वय स्थापित कर छात्रों को कौशल विकास से जोड़ें। प्रशिक्षण की प्रगति पर शासन स्तर से नियमित निगरानी की जाएगी और लापरवाही मिलने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव है।
119 महाविद्यालय जुड़े राज्य विश्वविद्यालयों से
प्रदेश के 12 राजकीय विश्वविद्यालयों से कुल 119 महाविद्यालय संबद्ध हैं। इनमें सबसे अधिक 59 महाविद्यालय श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय तथा 54 महाविद्यालय कुमाऊं विश्वविद्यालय हल्द्वानी से जुड़े हैं। इन संस्थानों में 80 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों से आती है, इसलिए कौशल प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
मैदानी जिलों में 70% उद्योग, पर्वतीय क्षेत्रों में चुनौती
राज्य के लगभग 70 प्रतिशत उद्योग हरिद्वार, देहरादून, उधम सिंह नगर और नैनीताल जैसे मैदानी जिलों में केंद्रित हैं। इन क्षेत्रों के संस्थानों के लिए उद्योगों से जुड़ना अपेक्षाकृत आसान होगा, जबकि चमोली और उत्तरकाशी जैसे पर्वतीय जिलों के कॉलेजों के लिए उद्योगों से संपर्क स्थापित करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ऐसे क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रही है।
डिजिटल पोर्टल से होगी पारदर्शी निगरानी
औद्योगिक प्रशिक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग एक डिजिटल पोर्टल विकसित कर रहा है। इस पोर्टल पर विश्वविद्यालयों को एमओयू, उपस्थिति, प्रशिक्षण विवरण और प्रगति रिपोर्ट अपलोड करनी होगी, जिससे शासन स्तर पर मूल्यांकन और निगरानी आसान हो सकेगी।

