बड़ी खबर – Parle-G फैक्ट्री बंद – एक युग का अंत, जानिए पूरी कहानी

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Parle-G फैक्ट्री बंद – एक युग का अंत, जानिए पूरी कहानी

भारत में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहां कभी Parle-G बिस्किट न खाया गया हो। चाय के साथ डुबोकर खाया जाने वाला यह बिस्किट सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि पीढ़ियों की यादों और भावनाओं से जुड़ा हुआ नाम है।
इसी बीच Parle-G से जुड़ी एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है, जिसने देशभर में लोगों को भावुक कर दिया है।

विले पार्ले की ऐतिहासिक फैक्ट्री हुई बंद

मुंबई के विले पार्ले (ईस्ट) स्थित Parle-G की सबसे पुरानी फैक्ट्री अब बंद कर दी गई है। यही वह फैक्ट्री थी, जहां से भारत के सबसे लोकप्रिय बिस्किट ने अपनी यात्रा शुरू की थी।
साल 1929 में स्थापित इस फैक्ट्री की इमारत को अब ध्वस्त किया जाएगा और यहां एक नया व्यावसायिक प्रोजेक्ट विकसित किया जाएगा।
करीब 97 वर्षों तक चली इस ऐतिहासिक फैक्ट्री को बंद किया जाना कई लोगों के लिए एक युग के अंत जैसा है।

1929 से शुरू हुआ था Parle का सफर

Parle Products की स्थापना वर्ष 1929 में मोहनलाल दयाल चौहान द्वारा मुंबई के विले पार्ले इलाके में की गई थी। शुरुआती दौर में कंपनी टॉफी और कैंडी का निर्माण करती थी।
वर्ष 1939 में कंपनी ने बिस्किट निर्माण की शुरुआत की और यहीं से जन्म हुआ Parle Gluco Biscuit का।
बाद में 1980 के दशक में इसका नाम बदलकर Parle-G Biscuit कर दिया गया, जिसने धीरे-धीरे देश के हर घर में अपनी खास पहचान बना ली।

‘Parle’ नाम की दिलचस्प कहानी

“Parle” नाम भी इसी इलाके से जुड़ा है। इसे Padle और Irle गांवों या फिर विरलेश्वर और पारलेश्वर मंदिरों से जोड़ा जाता है।
यही वजह है कि Parle सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि मुंबई के इतिहास का भी अहम हिस्सा बन गया।

Parle-G पैकेट की बच्ची का सच

Parle-G के पैकेट पर बनी मासूम बच्ची को लेकर दशकों से कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं। कभी इसे सुधा मूर्ति, कभी नीरू देशपांडे तो कभी किसी असली बच्ची से जोड़ा गया।
हालांकि, Parle Products के वाइस प्रेसिडेंट ने साफ किया है कि यह बच्ची कोई वास्तविक व्यक्ति नहीं है।
यह चित्र 1960 के दशक में कलाकार मगनलाल दहिया द्वारा Everest Creative के लिए डिजाइन किया गया था। इसका उद्देश्य मासूमियत, भरोसे और शुद्धता को दर्शाना था—जो Parle-G की पहचान बन गया।

फैक्ट्री बंद होने की वजह और आगे की योजना

विले पार्ले स्थित फैक्ट्री के बंद होने का कारण बदलती शहरी ज़रूरतें और भूमि का व्यावसायिक उपयोग बताया जा रहा है।
हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि Parle-G का उत्पादन बंद नहीं हो रहा है। देश के अन्य आधुनिक प्लांट्स में Parle-G का निर्माण पहले की तरह जारी रहेगा।
Parle-G की यह फैक्ट्री भले ही अब इतिहास बन गई हो, लेकिन इसका स्वाद, इसकी पहचान और इससे जुड़ी यादें आज भी करोड़ों भारतीयों के दिलों में ज़िंदा हैं।

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