असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में बड़ा घोटाला
एक-एक अभ्यर्थी से 35 लाख की डील, कई अधिकारी भी जांच के घेरे में
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में सेंधमारी के मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एसटीएफ की जांच में यह सामने आया है कि परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोह ने एक-एक अभ्यर्थी से 35-35 लाख रुपये में सौदा तय किया था। आरोपियों ने एडवांस के तौर पर 10 से 12 लाख रुपये पहले ही वसूल लिए थे, जबकि शेष रकम परीक्षा के कुछ दिन बाद लेने की योजना थी। हालांकि, इससे पहले ही एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया।
इस मामले में कई बड़े अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में आ चुके हैं। जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई जा रही है, उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
तीन आरोपी पहले ही गिरफ्तार, चार्जशीट दाखिल
शुरुआत में एसटीएफ ने विभूतिखंड थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में सहायक प्रोफेसर बैजनाथ पाल, उसका भाई विनय कुमार और आयोग की अध्यक्ष का गोपनीय सहायक महबूब अली गिरफ्तार किए गए थे। पुलिस ने तीनों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी।
डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह के अनुसार, बाद में मामले की दोबारा विवेचना के आदेश दिए गए, जिसके बाद जांच एसटीएफ को सौंप दी गई।
एसटीएफ जांच में खुलीं कई परतें
एसटीएफ की गहन जांच में भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की कई परतें सामने आईं। तफ्तीश में यह भी पता चला कि आरोपियों ने कई अन्य अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये की वसूली की थी। यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा था।
मोबाइल नंबरों से मिला अहम सुराग
जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से दर्जनों अभ्यर्थियों का डाटा बरामद हुआ। इन मोबाइल नंबरों का मिलान जब आयोग से प्राप्त अभ्यर्थियों की सूची से कराया गया, तो सभी जानकारियां पूरी तरह मेल खा गईं। इससे यह स्पष्ट हो गया कि परीक्षा में धांधली पूर्व नियोजित थी।
कई अधिकारी-कर्मचारी जांच के घेरे में
सूत्रों के मुताबिक, मामले में कई अधिकारी और कर्मचारी भी संदेह के घेरे में हैं। उनकी भूमिका की गहन जांच की जा रही है। जिनके खिलाफ पुख्ता साक्ष्य मिलेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
अभ्यर्थियों ने पहले ही उठाए थे सवाल
प्रयागराज।
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे। परीक्षा में रेंडमाइजेशन न होना सबसे बड़ा मुद्दा बना रहा। अभ्यर्थियों का आरोप था कि नकल माफिया एक साथ फॉर्म भरवाकर रोल नंबर हासिल कर लेते हैं और अलग-अलग सॉल्वर बैठाकर पैसे लेकर लोगों को पास कराते हैं।
इसके अलावा कई परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की पर्याप्त व्यवस्था न होने का आरोप भी लगाया गया। आयोग द्वारा परीक्षा केंद्रों पर 45 मिनट पहले पहुंचने की बाध्यता तय की गई थी, लेकिन कई केंद्रों पर इस नियम का पालन नहीं हुआ और निर्धारित समय के बाद पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को भी प्रवेश दिया गया।
इस मामले में एसटीएफ ने आयोग के एक आउटसोर्स कर्मचारी को भी गिरफ्तार किया था, जिस पर परीक्षा में अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं।

