बर्फबारी में फंसे मालिक की मौत, दो परिवारों में मातम ,वफादारी और मानवीय संवेदना की मिसाल ,आखिरी प्रयास और मौत
भरमौर के भरमाणी धार में बर्फबारी के बीच दो युवाओं और उनके कुत्ते की कहानी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। 22 जनवरी को फंसे पीयूष (13) निवासी घरेड़ और विकसित राणा (19) निवासी मलकोता को बचाने के प्रयास नाकाम रहे, और दोनों की मौत हो गई।
कुत्ते की वफादारी ने सबको हैरान कर दिया। पीयूष का कुत्ता अपने मालिक के शव के पास चार दिन तक भूखा-प्यासा बैठा रहा। उसने किसी को भी अपने मालिक के पास आने नहीं दिया। मंगलवार को बचाव दल के हेलिकॉप्टर से वहां आने पर कुत्ते की भौंकने की आवाज सुनाई दी, तब जाकर उन्होंने पीयूष के शव तक पहुँच पाए। बर्फ में कांपता कुत्ता अपने मालिक के पास से दूर नहीं हट रहा था।
स्थानीय लोग और बचाव दल कुत्ते की इस वफादारी को देखकर भावुक हो गए। उन्होंने कुत्ते को सुरक्षित तरीके से वहां से हटाया, उसके बाद पीयूष का शव हेलिकॉप्टर से भरमौर पहुंचाया गया।
दो परिवारों के लिए मातम
पीयूष के माता-पिता विक्रमजीत और नीलम कुमारी इस दुर्घटना से स्तब्ध हैं। पीयूष आठवीं कक्षा का छात्र था और परिवार में दो भाई भी हैं। विकसित राणा अपने परिवार का इकलौता बेटा था। डेढ़ साल पहले उनके पिता संजय कुमार की मृत्यु हो चुकी थी। उनकी माता अनिता और दादी मां इस हादसे से गहरे शोक में हैं।
दोनों ममेरे भाई थे और रील बनाने का शौक रखते थे। 22 जनवरी को उन्होंने भरमाणी धार में बर्फबारी के बीच जाने का फैसला किया, लेकिन तेज अंधड़ और भारी बर्फबारी के कारण फंस गए। दोनों ने जंगल में टेंट लगाकर रात बिताने की कोशिश की, लेकिन टेंट भी बर्फ और तेज हवा में तहस-नहस हो गया।
आखिरी प्रयास और मौत
पीयूष और विकसित राणा ने फोन पर मदद के लिए कॉल भी की थी। 23 जनवरी को शाम 6 बजे उन्होंने अपने परिवार को बताया कि वे जंगल में बर्फ के बीच फंस गए हैं। इसके बाद उनका फोन स्विच ऑफ हो गया। जंगल में फंसने के बाद उनकी कोशिशें असफल रही, और दोनों की मौत ने पूरे इलाके में मातम फैला दिया।
वफादारी और मानवीय संवेदना की मिसाल
कुत्ते की यह वफादारी, युवाओं की निडरता और परिवारों की हताशा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई। चार दिन तक अपने मालिक के पास रहने वाला यह कुत्ता, मानव और पशु के बीच के रिश्ते की सबसे बड़ी मिसाल साबित हुआ।

