स्थानांतरण विरोध और आरटीआई दुरुपयोग पर जिला प्रशासन की सख़्त कार्रवाई,
वरिष्ठ सहायक को दंड, प्रधान सहायक का जिला मुख्यालय से स्थानांतरण
नैनीताल।
जिला प्रशासन ने शासकीय अनुशासन, मर्यादा और नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख़्त रुख अपनाते हुए दो कर्मचारियों के विरुद्ध अलग-अलग कार्रवाई की है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट किया कि शासकीय सेवकों से अनुशासित एवं उत्तरदायी आचरण की अपेक्षा की जाती है और किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्थानांतरण आदेश के विरोध पर वरिष्ठ सहायक को दंड
स्थानांतरण आदेश के विरोध में सार्वजनिक मंच से शासकीय निर्णय की आलोचना करना, कार्यालय परिसर में उग्र प्रदर्शन व नारेबाजी करना तथा शासकीय कार्यवृत्त में दुराशयपूर्वक छेड़छाड़ करना राजस्व विभाग में कार्यरत वरिष्ठ सहायक विजय सिंह गैड़ा को भारी पड़ गया।
जांच अधिकारी की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने के बाद उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के प्रावधानों के अंतर्गत विभागीय कार्रवाई की गई।
जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित कार्मिक द्वारा सेवा संबंधी मामलों में बाह्य दबाव बनाने का प्रयास किया गया, जो एक लोक सेवक से अपेक्षित आचरण के विपरीत है।
इन कृत्यों को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए जिलाधिकारी ने श्री गैड़ा की भर्त्सना किए जाने के साथ-साथ उनकी दो वार्षिक वेतन वृद्धियां दो वर्षों के लिए रोके जाने का आदेश पारित किया है।
आरटीआई के दुरुपयोग पर प्रधान सहायक को चेतावनी व स्थानांतरण
दूसरे मामले में जिलाधिकारी कार्यालय में तैनात प्रधान सहायक मोहम्मद अकरम द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत अपने ही कार्यालय से अत्यधिक मात्रा में सूचना मांगे जाने और बाद में उसे बिना किसी वैध कारण के प्राप्त करने से इनकार किए जाने को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री अकरम द्वारा विभिन्न पटलों से व्यापक सूचना मांगी गई थी। सीमित मानव संसाधनों के बावजूद लोक सूचना अधिकारी द्वारा कई दिनों के परिश्रम के बाद लगभग तीन हजार पृष्ठों की सूचना संकलित कर नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई, लेकिन इसके बाद भी संबंधित कर्मचारी ने सूचना लेने से इनकार कर दिया, जिससे कार्यालयीन कार्यप्रणाली प्रभावित हुई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला
जारी आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने का माध्यम है, न कि शासकीय तंत्र को बाधित करने या सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग का साधन।
एक लोक सेवक से सामान्य नागरिक की तुलना में अधिक संयमित और उत्तरदायी आचरण की अपेक्षा की जाती है।
प्रकरण में मोहम्मद अकरम की औपचारिक भर्त्सना करते हुए उन्हें भविष्य में आरटीआई के प्रयोग और शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में विधिक मर्यादाओं के पालन की कड़ी चेतावनी दी गई है। साथ ही प्रशासनिक आधार पर उनका जिला मुख्यालय से स्थानांतरण भी कर दिया गया है।
जिलाधिकारी का सख़्त संदेश
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने दो टूक कहा कि शासकीय सेवकों द्वारा अनुशासन, मर्यादा और नियमों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। प्रशासन भविष्य में भी इस प्रकार के मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रखेगा।

