लोहड़ी- आग की लौ में सुलगती परंपरा, रिश्तों की गर्माहट और नई शुरुआत का उत्सव

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लोहड़ी- आग की लौ में सुलगती परंपरा, रिश्तों की गर्माहट और नई शुरुआत का उत्सव
लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि पंजाब की मिट्टी से उपजी वह सांस्कृतिक चेतना है, जो ठंड की सबसे लंबी रातों में भी दिलों को गर्माहट से भर देती है। यह त्योहार फसल के स्वागत, मेहनत के सम्मान और सामूहिक उल्लास का प्रतीक है। जब लोहड़ी की अग्नि प्रज्वलित होती है, तो उसके चारों ओर सिर्फ तिल, मूंगफली और रेवड़ी ही नहीं डाली जाती, बल्कि बीते साल की थकान, दुख और निराशाएं भी उसी आग में समर्पित कर दी जाती हैं।
लोहड़ी का मूल भाव ‘साझा खुशी’ है। परिवार, पड़ोसी और मित्र जब एक साथ आग के चारों ओर घूमते हैं, लोकगीत गाते हैं और तालियों की गूंज के साथ उत्सव मनाते हैं, तब सामाजिक एकता की तस्वीर सजीव हो उठती है। यह पर्व याद दिलाता है कि खुशियां बांटने से बढ़ती हैं और परंपराएं निभाने से रिश्ते मजबूत होते हैं।
आधुनिक समय में, जब जीवन की व्यस्तता और दूरियां अपनों से मिलने में बाधा बन जाती हैं, तब लोहड़ी के शुभकामना संदेश रिश्तों को जोड़ने का माध्यम बन जाते हैं। व्हाट्सएप, फेसबुक और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भेजा गया एक सच्चा संदेश केवल शब्द नहीं होता, वह अपनापन, सम्मान और शुभेच्छा का संकेत होता है। “लख-लख बधाई” के शब्दों में सुख, समृद्धि और लंबे जीवन की कामना छिपी होती है।
लोहड़ी का विशेष महत्व बच्चों और नवविवाहितों के लिए भी होता है। बच्चों के लिए यह उल्लास और उत्साह का पर्व है, तो नवविवाहित जोड़ों के लिए नए जीवन की शुभ शुरुआत। बुजुर्गों के लिए यह पर्व सम्मान और संस्कारों की निरंतरता का एहसास कराता है, वहीं युवाओं के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर बनता है।
असल में, लोहड़ी हमें सिखाती है कि जीवन में हर साल एक नई फसल की तरह होता है—मेहनत, धैर्य और उम्मीद से भरा। जब हम लोहड़ी की आग में पुराने दुखों को छोड़कर नई आशाओं का स्वागत करते हैं, तभी यह पर्व अपने वास्तविक अर्थों में पूर्ण होता है। इस लोहड़ी, आइए शुभकामनाओं के माध्यम से दिल से दिल तक खुशी पहुंचाएं और अपनों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरें।
लख-लख बधाई, हैप्पी लोहड़ी।
~शानू जर्नलिस्ट ✍️

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