नौकरी का झांसा देकर डंकी मार्ग से म्यांमार ले जाकर दो युवकों को बनाया बंधक
फर्जी फेसबुक आईडी बनाने का दबाव, प्रताड़ना के बाद किसी तरह बचकर लौटे भारत
उत्तरकाशी।
उत्तरकाशी जनपद के दो युवकों को विदेश में नौकरी का झांसा देकर डंकी मार्ग के जरिए म्यांमार ले जाने और वहां अवैध रूप से बंधक बनाकर साइबर ठगी से जुड़ा काम कराने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ितों ने विरोध किया तो उनके साथ मारपीट व मानसिक प्रताड़ना की गई। बाद में म्यांमार में सैन्य संघर्ष के दौरान वे किसी तरह वहां से भाग निकले। एनजीओ और भारतीय दूतावास की मदद से दोनों युवक भारत लौट पाए।
पीड़ित यशपाल बिष्ट निवासी चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दी तहरीर में बताया कि जून 2025 में उनके परिचित कन्हैया बिल्जवाण ने उनकी आर्थिक स्थिति का हवाला देकर विदेश में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद दिल्ली निवासी केशव बिल्जवाण से संपर्क कराया गया, जिसने स्वयं को विदेशों में नौकरी दिलाने वाला एजेंट बताया।
केशव ने जूम ऐप के माध्यम से कथित इंटरव्यू करवाया, जिसमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल थे। 26 जून 2025 को दिल्ली से बैंकॉक का टिकट भेजकर दोनों युवकों को दिल्ली बुलाया गया और उनसे टिकट के नाम पर 13-13 हजार रुपये लिए गए।
बैंकॉक पहुंचने के बाद युवकों को मैसोट ले जाया गया और फिर जंगल के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश कराया गया। वहां डांगयांग क्षेत्र में एक कंपनी में उन्हें रखा गया, जहां चीनी नागरिकों द्वारा संचालित ऑफिस में फर्जी फेसबुक आईडी बनाने और एडिटिंग का काम कराया जाने लगा।
पीड़ितों के अनुसार जब उन्होंने इस काम से इनकार किया तो उन्हें एक ही भवन में कई दिनों तक कैद रखा गया और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी गई। बाद में म्यांमार में सैन्य संघर्ष शुरू होने पर चीनी नागरिक वहां से फरार हो गए, जिसका फायदा उठाकर युवक भाग निकले।
इसके बाद दोनों युवक म्यांमार में भटकते रहे और एक एनजीओ की मदद से करीब एक माह सुरक्षित रहे। अंततः भारतीय दूतावास के सहयोग से उन्हें भारत वापस लाया गया।
एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर केशव बिल्जवाण और शिवम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।

