उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त: बीड़ी पांडे अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट को दुरुस्त करने के निर्देश, सेनेटोरियम हॉस्पिटल की डीपीआर पर मांगी प्रगति रिपोर्ट
नैनीताल।
उत्तराखंड हाईकोर्ट में प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) नैनीताल और पीएमएस न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।
अदालत को अवगत कराया गया कि नैनीताल के बीड़ी पांडे अस्पताल के आईसीयू में ऑक्सीजन सप्लाई में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट से आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिसके चलते सिलेंडरों के माध्यम से ऑक्सीजन दी जा रही है। इस व्यवस्था के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सचिव स्वास्थ्य को निर्देश दिए कि बीड़ी पांडे अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट को शीघ्र सुचारू किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने सेनेटोरियम हॉस्पिटल को मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में परिवर्तित करने से संबंधित डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) की प्रगति रिपोर्ट भी पेश करने के आदेश दिए हैं।
आज इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई।
याचिका के अनुसार, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने उच्च न्यायालय को बताया कि प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में मरीजों को न तो मूलभूत सुविधाएं मिल पा रही हैं और न ही समुचित इलाज की व्यवस्था है। स्टाफ की कमी, उपकरणों की खराब स्थिति और आवश्यक मशीनों के अनुपलब्ध होने के कारण मरीजों को अक्सर हायर सेंटर रेफर किया जाता है।
याचिका में यह भी कहा गया कि कई अस्पताल इंडियन हेल्थ स्टैंडर्ड्स के मानकों पर खरे नहीं उतरते। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने न्यायालय से आग्रह किया है कि सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं, ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।

