नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रशासन के एक हालिया आदेश ने होली से पहले ही प्राध्यापकों और कर्मचारियों की छुट्टियों की तैयारियों पर पानी फेर दिया। विश्वविद्यालय की ओर से दोपहर में 2 मार्च और 5 मार्च को अवकाश घोषित किया गया, लेकिन चंद घंटों के भीतर ही यह आदेश निरस्त कर दिया गया। इस अचानक फैसले से शिक्षकों और कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बन गई है।
जानकारी के अनुसार 20वें दीक्षांत समारोह के आयोजन के चलते पूर्व में 1 नवंबर (इगास) और 2 नवंबर (रविवार) के एवज में अवकाश की लिखित सूचना जारी की गई थी। अब विश्वविद्यालय प्रशासन अपने ही निर्णय पर बैकफुट पर नजर आ रहा है। ताजा पत्र में कहा गया है कि उक्त अवकाश पहले ही 6 और 7 नवंबर को समायोजित किए जा चुके हैं, इसलिए 2 और 5 मार्च को घोषित अवकाश निरस्त किए जाते हैं।
इस निर्णय ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि अवकाश पहले ही समायोजित थे तो दोबारा उन्हें घोषित कर निरस्त करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। बार-बार आदेशों में बदलाव से प्रशासनिक समन्वय और निर्णय प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
कुलसचिव डॉ. मंगल सिंह मंद्रवाल द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में दिए गए अवकाश के समायोजन को देखते हुए 2 और 5 मार्च के अवकाश को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय कर्मचारियों और प्राध्यापकों के बीच असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।

