भालू के खौफ से उजड़ा गांव – पौड़ी का बसटांग बना ‘घोस्ट विलेज’, आखिरी परिवार ने भी छोड़ा पैतृक घर किया पलायन
पौड़ी गढ़वाल।
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में जंगली जानवरों का आतंक अब पूरे गांवों को खाली कराने पर मजबूर कर रहा है। पोखड़ा ब्लॉक का राजस्व गांव बसटांग भालू के लगातार हमलों के चलते पूरी तरह वीरान हो चुका है। कभी 20 से अधिक परिवारों से गुलजार रहने वाला यह गांव अब ताले और सन्नाटे का प्रतीक बन गया है।
लगातार हमलों से डरे आखिरी परिवार ने भी गांव छोड़ दिया। पलायन कर चुके परिवार का कहना है—
“अगर वहां रहते तो हम भी जिंदा नहीं बचते।”
भालू के आतंक ने छीनी रोजी-रोटी
दैनिक भास्कर न्यूज एप की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, बसटांग गांव में पिछले कुछ समय से भालू का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा था। हमलों में मवेशी मारे गए, खेत-खलिहान उजड़ गए और लोगों की आजीविका समाप्त हो गई।
पीड़ित हरिप्रसाद ने बताया कि उनके पास एक जोड़ी बैल और गाय थीं, जिनसे परिवार का गुजर-बसर चलता था।
“भालू ने सब मार डाला। अब न रोजी बची है और न ही गांव में रहना सुरक्षित है।”
प्रशासन पर गंभीर आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने कई बार वन विभाग और प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
हरिप्रसाद का कहना है कि अधिकारी गांव आए जरूर, लेकिन सिर्फ नुकसान की तस्वीरें खींचकर लौट गए।
न तो भालू से बचाव के स्थायी इंतजाम किए गए और न ही मवेशियों का मुआवजा दिया गया।
पनिया गांव में शरणार्थी जैसा जीवन
पैतृक घर में ताला लगाकर हरिप्रसाद का परिवार अब पनिया ग्राम सभा में शरण लेने को मजबूर है।
ग्राम प्रधान हर्षपाल सिंह नेगी और ग्रामीणों ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए परिवार को सहारा दिया। ग्रामीण खुद उनका सामान लेकर आए और जीवनयापन में मदद कर रहे हैं।
पनिया गांव में भी बढ़ता खतरा
पनिया गांव में लगभग 35 परिवार रहते हैं, लेकिन यहां भी हालात चिंताजनक हैं।
ग्राम प्रधान हर्षपाल सिंह नेगी के मुताबिक, भालू का आतंक बसटांग तक सीमित नहीं है। महिलाओं में डर का माहौल है और घास-लकड़ी लेने जंगल जाना जोखिम भरा हो गया है।
उन्होंने बताया कि वन विभाग की टीम गांव आई थी, लेकिन यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि भालू को मारना प्रतिबंधित है। टीम कैमरे लगाकर लौट गई।
इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी पत्र भेजा गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
‘सिस्टम की उदासीनता से हुआ पलायन’
पोखड़ा क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य बलवंत सिंह नेगी ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा—
“बसटांग गांव से पलायन सिस्टम की उदासीनता का नतीजा है। भालू द्वारा लगातार मवेशी मारे गए। एक गरीब परिवार अकेला रह गया था, जिसकी पूरी आजीविका खत्म हो गई, लेकिन बार-बार अवगत कराने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला।”
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा कई बार जिला पंचायत बैठकों और शासन-प्रशासन के सामने उठाया गया, मगर हर बार नजरअंदाज कर दिया गया।
भालू के खौफ से खाली हुआ पूरा गांव, पौड़ी का बसटांग बना भूतिया बस्ती
जंगल का आतंक, सिस्टम की चुप्पी: बसटांग से आखिरी परिवार का भी पलायन

