अपंजीकृत डॉक्टर के इंजेक्शन से युवक की मौत
बिना पंजीकरण चल रहा था अस्पताल, सीएमओ जांच में खुला अवैध इलाज का सच
गलत इंजेक्शन से बिगड़ी हालत, तीन शहर भटके परिजन—दिल्ली में थमी सांस
रुद्रपुर। भूरारानी क्षेत्र में अपंजीकृत डॉक्टर द्वारा लगाए गए गलत इंजेक्शन से युवक की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। सर्दी-जुकाम जैसे सामान्य रोग में लगाए गए इंजेक्शन ने युवक की हालत बिगाड़ दी और अंततः उसकी जान चली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित डॉक्टर न तो पंजीकृत था और न ही अस्पताल वैध, इसके बावजूद क्षेत्र में खुलेआम इलाज किया जा रहा था।
फौजी मटकोटा, भूरारानी निवासी रमेश शर्मा ने दो दिन पूर्व कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर अपंजीकृत डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई थी। तहरीर में उन्होंने अपने पुत्र अंशुल शर्मा की मौत के लिए सीधे तौर पर गलत इंजेक्शन को जिम्मेदार ठहराया है।
रमेश शर्मा के अनुसार 24 जुलाई को अंशुल सर्दी-जुकाम के इलाज के लिए भूरारानी स्थित एक निजी अस्पताल गया था, जहां अपंजीकृत डॉक्टर ने बिना किसी जांच और मानकों के इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगते ही अंशुल की हालत बिगड़ गई, वह अस्पताल में ही बेहोश होकर गिर पड़ा और उसके मुंह से झाग निकलने लगा।
परिजन घबराकर उसे पहले रुद्रपुर, फिर बरेली के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जब वहां भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने उसे दिल्ली के निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, जहां 30 जुलाई को उसकी सांसें थम गईं।
मृतक के पिता का आरोप है कि उक्त अपंजीकृत डॉक्टर पहले भी कई लोगों को इंजेक्शन लगाकर बीमार कर चुका है, लेकिन समय रहते कार्रवाई न होने के कारण यह लापरवाही एक युवक की मौत में बदल गई।
मामले के सामने आने के बाद सीएमओ की जांच में अस्पताल के अवैध रूप से संचालित होने की पुष्टि हुई है। बिना पंजीकरण और बिना निर्धारित मानकों के मरीजों का इलाज किया जा रहा था।
सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि युवक की मौत की सूचना के बाद अस्पताल की जांच कराई गई, जिसमें अवैध संचालन का खुलासा हुआ है। अपंजीकृत डॉक्टर और अस्पताल संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं सीओ सिटी प्रशांत कुमार ने बताया कि मृतक के पिता की तहरीर की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। एक दिन पूर्व मामला उजागर

