पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0 को झटका, उत्तराखंड में 5 महीने में नहीं मिला कोई निजी डेवलपर
देहरादून। उत्तराखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत पीपीपी मोड में प्रस्तावित सस्ते आवास परियोजनाओं को झटका लगा है। पिछले पांच महीनों से सरकार निजी डेवलपर्स की तलाश कर रही है, लेकिन अब तक किसी भी डेवलपर ने इसमें रुचि नहीं दिखाई है। इससे राज्य में सस्ते घर उपलब्ध कराने की योजना पर असर पड़ सकता है।
फरवरी में सरकार ने दोबारा टेंडर जारी कर 31 मार्च तक निजी कंपनियों को आमंत्रित किया था, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का भुगतान मॉडल डेवलपर्स को व्यावहारिक नहीं लग रहा। उनका कहना है कि लाभार्थियों की किश्तों और सरकारी सब्सिडी पर निर्भर व्यवस्था में पैसे के प्रवाह को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, जिससे परियोजनाएं वित्तीय रूप से जोखिम भरी हो जाती हैं।
यदि जल्द ही निजी भागीदार नहीं मिले तो राज्य में सस्ते आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय समयसीमा से आगे खिसक सकता है। इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से विशेष प्रोत्साहन और नियमों में लचीलापन देने का अनुरोध किया है, ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ सके।
अन्य राज्यों में भी यही स्थिति
विशेषज्ञों के अनुसार पीपीपी मॉडल की अफोर्डेबल हाउसिंग परियोजनाओं में सुस्ती केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी डेवलपर्स की रुचि कम रही है। वहां सरकारों ने अतिरिक्त एफएआर, शुल्क में छूट और सिंगल विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाएं देकर परियोजनाओं को गति देने की कोशिश की है।

