केन्द्रीय बजट 2026-27 विकसित भारत 2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड का ठोस रोडमैप: मुख्यमंत्री धामी
आम नागरिक के जीवन में वास्तविक बदलाव का माध्यम है बजट, पर्यटन से ग्रीन एनर्जी तक विकास को मिलेगी नई रफ्तार
हल्द्वानी |
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केन्द्रीय बजट 2026-27 को विकसित भारत 2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी बजट बताते हुए कहा कि यह केवल वर्तमान की आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों के लिए देश और राज्यों की मजबूत व टिकाऊ नींव रखता है।
बुधवार को दो दिवसीय नैनीताल भ्रमण के दौरान हल्द्वानी के रामपुर रोड स्थित होटल अमरदीप में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बजट देश की आत्मा, आत्मविश्वास और विकासशील सोच को मजबूती देता है तथा आम नागरिक के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव का माध्यम बनता है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूंजीगत व्यय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी से दीर्घकालिक विकास की ठोस आधारशिला रखी गई है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के साथ-साथ यह बजट भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता को भी सुदृढ़ करता है।
उन्होंने कहा कि सरकार के लिए विकास केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि मध्यम वर्ग, करदाताओं और श्रमिकों के जीवन में सम्मान और राहत का प्रतीक है। नवाचार, विनिर्माण और रोजगार पर केंद्रित यह बजट देश की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ स्थायी रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत व्यय यह दर्शाता है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल आज की जरूरत नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की शक्ति मानती है। सात नए कॉरिडोर, आधुनिक परिवहन नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स ढांचे का विस्तार निवेश, उद्योग और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती देगा। वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर व्यापार, पर्यटन, रोजगार और राष्ट्रीय एकता के नए द्वार खोलेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट से उत्तराखंड के समावेशी विकास को सीधा लाभ मिलेगा। पर्वतीय, सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों के साथ-साथ गांवों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया गया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय करों में उत्तराखंड का हिस्सा ₹17,414.57 करोड़ निर्धारित किया गया है, जिससे राज्य को इस वर्ष ₹1,841.16 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि प्राप्त होगी।
उन्होंने बताया कि स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट योजना का न केवल विस्तार किया गया है, बल्कि इसके प्रावधान बढ़ाकर संशोधित अनुमान ₹1,44,000 करोड़ से ₹1,85,000 करोड़ कर दिए गए हैं, जो ₹41,000 करोड़ की वृद्धि है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी योजना के विस्तार से महिलाओं को आजीविका से उद्यमिता की ओर बढ़ने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वहीं रेलवे क्षेत्र में उत्तराखंड को ₹4,769 करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन मिला है, जो 2009-14 की तुलना में 26 गुना अधिक है। राज्य में ₹39,491 करोड़ की रेल परियोजनाएं प्रगति पर हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अंतिम चरण में है, 11 स्टेशन अमृत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित किए जा रहे हैं और 100 प्रतिशत रेल विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है।
पर्यटन, ग्रीन एनर्जी और सतत विकास पर विशेष बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित ऊर्जा, सौर और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं से उत्तराखंड को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। आयुष, फार्मा, खादी, हथकरघा और सूक्ष्म-लघु उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद में महिला छात्रावास की व्यवस्था से महिला सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण को नई मजबूती मिलेगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और विश्वास आधारित शासन से निवेश, रोजगार और जनभागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 किसानों को सशक्त करता है, युवाओं को अवसर देता है, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाता है और पर्वतीय राज्यों को नई पहचान देता है। बजट के तीन प्रमुख स्तंभ—संतुलित व समावेशी विकास, वंचित वर्गों का क्षमता निर्माण और सबका साथ-सबका विकास—उत्तराखंड सहित पूरे देश के समग्र उत्थान का स्पष्ट मार्ग प्रशस्त करते हैं।
उन्होंने बताया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास से देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों को विशेष लाभ मिलेगा। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप राज्य के हितों का ध्यान रखा गया है, जो राज्य-केंद्र के सहयोगात्मक संघवाद का सशक्त उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 उत्तराखंड को रोजगार, निवेश, निर्यात, कौशल विकास और शहरी अवसंरचना के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित होगा और राज्य के संतुलित, समावेशी व सतत विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

