गौला खनन में वजन नियमों पर विवाद, मजदूर समिति ने डीएलएम से जताई आपत्ति
185 कुंतल सीमा पर सख्ती की मांग, तिरपाल अनिवार्यता पर भी उठे सवाल
गौला नदी खनन नीति में बदलाव की मांग, मजदूरों ने बताया नियम अव्यावहारिक
हल्द्वानी। गौला नदी से उपखनिज निकासी में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को लेकर गौला खनन मजदूर उत्थान समिति के पदाधिकारियों ने मंगलवार को लॉगिंग प्रबंधक (डीएलएम) गौला से मुलाकात कर आपत्ति दर्ज कराई। समिति अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने वन विभाग द्वारा लागू की गई वजन संबंधी व्यवस्था को मजदूरों और वाहन स्वामियों के साथ अन्यायपूर्ण बताया।
रमेश चंद्र जोशी ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के तहत 185 कुंतल से अधिक वजन होने पर केवल एक दिन की निकासी रोकी जाती है, जबकि पूर्व में 200 कुंतल से अधिक वजन होने पर वाहन को वापस खाली कराया जाता था। समिति का कहना है कि मौजूदा नीति से नियमों की अनदेखी को बढ़ावा मिल रहा है और अनुशासन खत्म हो रहा है।
समिति ने निगम से मांग की कि 185 कुंतल से अधिक वजन पर एक दिन तथा इससे अधिक वजन पाए जाने पर दो दिन की निकासी पर रोक का प्रावधान किया जाए, ताकि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके।
वहीं जिलाधिकारी द्वारा गौला नदी में चल रहे वाहनों पर तिरपाल अनिवार्य करने के निर्देशों पर भी समिति ने आपत्ति जताई। पदाधिकारियों का कहना है कि गौला नदी से निकलने वाला आरबीएम गीला रहता है, जिससे धूल नहीं उड़ती और उपखनिज वाहन की बॉडी के भीतर रहता है। ऐसे में तिरपाल लगाने का दबाव व्यावहारिक नहीं है। समिति ने वाहन मालिकों को अनावश्यक रूप से परेशान न किए जाने की मांग की।
शिष्टमंडल में रमेश जोशी के अलावा विजय बिष्ट, दीपू धोनी, तवीन्द्र ऐठानी, दयाल सिंह, हरीश सिंह सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

