देहरादून अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक पर आरबीआई की रोक, 124 करोड़ जमाराशि पर संकट — विलय ही दिख रहा सुरक्षित विकल्प
देहरादून। देहरादून अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है, जिससे खाताधारकों के करीब 124 करोड़ रुपये दांव पर लग गए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए उस पर छह महीने का प्रतिबंध लगा दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बैंक घाटे में होने के बावजूद उसे लाभ में दर्शाया जाता रहा, जिससे उसकी वास्तविक आर्थिक स्थिति छिपी रही।
सूत्रों के अनुसार बैंक का वित्तीय ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। बैंक को अभी भी लगभग 50 से 58 करोड़ रुपये की कर्ज वसूली करनी है, जबकि सभी संभावित संसाधनों को मिलाकर भी वह करीब 105 करोड़ रुपये ही जुटा पाने की स्थिति में है। ऐसे में यदि बैंक बंद होता है तो जमाकर्ताओं को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मौजूदा हालात में बैंक के सामने दो विकल्प हैं। पहला, बैंक कामकाज बंद कर दे, जिसके बाद आरबीआई परिसमापक नियुक्त कर परिसंपत्तियों और देनदारियों के आधार पर बैंक का निस्तारण कर दे। विशेषज्ञों के अनुसार यह रास्ता खाताधारकों के लिए अधिक कष्टकारी साबित हो सकता है।
दूसरा विकल्प किसी सक्षम सहकारी बैंक में विलय (मर्जर) का है। माना जा रहा है कि बैंक प्रबंधन इस दिशा में सक्रिय है और अल्मोड़ा अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में विलय की संभावना तलाश रहा है। यदि विलय होता है तो खाताधारकों की जमा राशि सुरक्षित रह सकती है और बकाया ऋण की वसूली भी तेज हो सकेगी।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। फिलहाल जमाकर्ताओं की निगाहें आरबीआई और बैंक प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं।

