बहुचर्चित -12 साल बाद फिर सुनाई गई फांसी, दोषी संजय सिंह को दोबारा मृत्युदंड -तलवार को धार देकर गर्भवती भाभी को बनाया पहला शिकार -शोर सुनकर पहुंची मां को भी नहीं बख्शा,
टिहरी गढ़वाल के बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड में अदालत ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए दोषी संजय सिंह को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। गर्भवती भाभी का सिर धड़ से अलग करने और फिर अपने भाई व मां की बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी को अपर सत्र न्यायाधीश, टिहरी की अदालत ने फांसी और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
यह सनसनीखेज वारदात 13 दिसंबर 2014 को हुई थी, जिसने पूरे जिले को दहला दिया था। निचली अदालत ने 24 अगस्त 2021 को पहली बार आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी। मामला पुष्टि के लिए नैनीताल हाईकोर्ट भेजा गया। 10 मई 2022 को हाईकोर्ट ने आरोपी की मानसिक स्थिति की जांच के आदेश देते हुए प्रकरण पुनः विचारण के लिए निचली अदालत को लौटाया था। विस्तृत मानसिक परीक्षण में आरोपी को ट्रायल के लिए पूर्णतः सक्षम पाया गया, जिसके बाद दोबारा सुनवाई शुरू हुई और अदालत ने अभियोजन पक्ष के ठोस साक्ष्यों के आधार पर पुनः मृत्युदंड का फैसला सुनाया।
तलवार को धार देकर गर्भवती भाभी को बनाया पहला शिकार
घटना वाले दिन आरोपी ने घर से तलवार निकाली और उसे धार दी। सुबह वह जंगल पहुंचा, जहां उसकी गर्भवती भाभी कांता देवी बकरी चरा रही थीं। आरोपी ने अचानक हमला कर तलवार से उनका सिर धड़ से अलग कर दिया। यह निर्मम हत्या पूरे क्षेत्र में दहशत का कारण बनी।
झाड़ियों में छिपकर भाई पर पीछे से वार, मौके पर मौत
भाभी की हत्या के बाद आरोपी गांव लौटा और झाड़ियों में छिप गया। जैसे ही उसका भाई सुरेंद्र सिंह वहां पहुंचा, आरोपी ने पीछे से उस पर तलवार से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के चलते भाई की मौके पर ही मौत हो गई।
शोर सुनकर पहुंची मां को भी नहीं बख्शा,
पिता सदमे से चल बसे
घटना का शोर सुनकर मां मीना देवी मौके की ओर दौड़ीं, लेकिन आरोपी ने रास्ते में ही उन पर भी जानलेवा हमला कर उनकी हत्या कर दी। आरोपी ने अपने पिता को भी मारने की योजना बनाई थी, लेकिन वह उस समय घर पर नहीं थे, जिससे उनकी जान बच गई। हालांकि, इस हृदयविदारक घटना के सदमे से कुछ समय बाद पिता की भी मौत हो गई।
तलवार और लाइसेंसी बंदूक के साथ कमरे में छिपा आरोपी
तीनों हत्याओं के बाद आरोपी अपने पिता की लाइसेंसी बंदूक और खून से सनी तलवार लेकर घर के एक कमरे में बंद हो गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोपी ने बाहर आने से इनकार कर दिया। पुलिस को उसे पकड़ने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
दोबारा सुनवाई में भी नहीं मिली राहत
पुनः सुनवाई के दौरान आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया, लेकिन अभियोजन पक्ष ने अदालत में पुख्ता साक्ष्य पेश किए। दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद अदालत ने 20 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाते हुए आरोपी को दोबारा फांसी और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
करीब 12 साल पुराने इस तिहरे हत्याकांड में अदालत के इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। यह निर्णय न केवल अपराध की गंभीरता को रेखांकित करता है, बल्कि न्याय प्रणाली की सतत प्रक्रिया को भी दर्शाता है।

